Minuscule mind

मन वाभर सैर भैरं, क्षणात रुसणारं
मन बेधुंद उडणारं, क्षणात हसणारं

 

मन वाहे गगनात, मन मस्त आनंदीत
मन भावना रुजवीत, मन मोठ्ठ समजूत

 

मन काबूत शिंपीत, मन दावणीला जोडत
मन पंख पसरत, मन उंच उंच झोकत

 

मन मोहोर फुलत, मन बहर सजत
मन स्वप्नं गुंफत, मन जग जिंकत

 

मन सुंदर सुरेख काव्य कवी कल्पत
मन हे मीने परी स्वच्छंद अलगद तरंगत

by Milind Kale

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